बच्चों के लिए कौन सी साइकिल खरीदे – Best Kids bicycle guide in Hindi

बच्चों के लिए साइकिल – Kids bicycle guide in Hindi

साइकिल के बिना बचपन की परिकल्पना करना लगभग असंभव ही हैं। बच्चों के लिए साइकिल शारीरिक विकास का एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। साइक्लिंग करने से मांसपेशियां मजबूत एवं शरीर में रक्त संचार सुचारू रूप से प्रवाहित होता है जो कि बच्चो के लिए काफी फायदेमंद हैं। यदि आप भी अपने बच्चो के लिए साइकिल खरीदने के बारे में सोच रहे है तो आप बिल्कुल सही जगह पर है।

आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपके बच्चों के लिए एक बेहतरीन साइकिल खरीदने में आपका मार्गदर्शन करेंगे। हालाकि, मार्केट में कई ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विकल्प मौजूद हैं। लेकिन अपने बच्चो के लिए एक बेहतर साइकिल खरीदते समय आपको किन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए ये आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

बच्चों के लिए साइकिल खरीदते समय क्या ध्यान रखे?- What to keep in mind while buying a bicycle for kids):

  1. बच्चे की उम्र (Age)
  2. ऊंचाई (Height)
  3. उद्देश्य (Purpose)
  4. कीमत (Price)
  5. बनावट (Design)
  6. ब्रेक्स (Brakes)
  7. पहिए (Wheels)
  8. ढांचा (frame)
  1. बच्चे की उम्र (Age):

बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की साइकिल सीखने की एक निश्चित उम्र होती हैं। साइकिल लेते वक्त आपको अपने बच्चे की उम्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उदाहरण के तौर पर माउंटेन या हाइब्रिड साइकिल एक निश्चित उम्र के बाद ही बच्चे सीख सकते है क्योंकि इन साइकिल्स में अधिक चोट लगने का खतरा बना रहता हैं। इसके विपरीत ट्राइसाइकिल या बैलेंस साइकिल बच्चे 2-4 साल की उम्र में ही चलाना शुरू कर देते हैं।

  1. ऊंचाई (Height):

 साइकिल लेते वक्त आपको वाहन की उंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चे के वाहन के उचित चयन के लिए, आपको बच्चे को एक सपाट सतह पर रखना होगा। साइकिल को बच्चे के पैरों के बीच रखें। 5-10 सेंटीमीटर परिवहन के फ्रेम और क्रॉच के बीच से मुक्त स्थान रहना चाहिए। ऐसा करने से आपातकालीन स्थिति यदि आपका बच्चा साइकिल से कूदना चाहे तो आसानी से कूद सकता हैं।

हम आपकी सुविधा के लिए बच्चे की ऊंचाई के अनुसार आपको साइकिल के आकार के कुछ उदाहरण दे रहे है,जो आपको एक उपयुक्त साइकिल खरीदने में मदद करेंगे:

85cm और 1m- 10 इंच साइकिल के बीच

90cm और 1.05m- 12 से 14 इंच की साइकिल के बीच

1.05 मी और 1.20 मी- 16 इंच की साइकिल के बीच

 

 

Kids bicycle guide in Hindi

  1. उद्देश्य (Purpose):

बच्चे 6 साल की उम्र में विभिन्न तरीकों से साइकिल का उपयोग करना शुरू कर देते हैं। जैसे हाइब्रिड, माउंटेन या बीएमएक्स साइकिल्स। आप अपने बच्चे के उपयोग एवं उद्देश्य के आधार पर साइकिल का चयन करें। उदारण के तौर पर पार्कों में उपयोग करने के लिए बीएमएक्स मॉडल सही विकल्प हैं और यदि आप थोड़ी खुरदरी सतह पर सवारी कर रहे हैं तो माउंटेन बाइक सबसे अच्छा विकल्प है।

  1. कीमत (Price):

आप अपने बच्चे की साइकिल वाहन के आकार की मूल्य सीमा के आधार पर चुने। इससे आप एक अच्छी साइकिल सही कीमत पर खरीद पाएंगे। मार्केट में ऐसे कई साइकिल्स उपलब्ध है कि अच्छी गुणवत्ता के साथ काफी सस्ती भी हैं, क्योंकि वे मिश्र धातु धातुओं से बनी हल्की बाइक के बजाय स्टील से बनी होती हैं। जो साइकिल के पहियों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।

  1. बनावट (Design):

साइकिल खरीदते समय इसके बनावट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। एक विशिष्ट और सुरक्षित बनावट ही साइकिल को बच्चों के लिए उपयुक्त बनाती है।  संभवतः कुछ साइकिल कंपनीज अपने बनावट को विशिष्ट दिखाने के चक्कर में साइकिल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान नहीं देती। जिस कारण सवार के सामने डिजाइन किए गए विशाल बोल्ट और स्पाइकी गियर शिफ्ट, आगे गिरने पर उसे गहरी चोट दे सकते हैं।

  1. ब्रेक्स (Brakes):

साइकिल का सबसे महत्वपूर्ण मैकेनिकल पार्ट ब्रेक होता है। साइकिल में आमतौर पर हैंडब्रेक या कोस्टर ब्रेक या दोनों होते हैं। चूंकि बच्चे अक्सर ब्रेक्स का ही उपयोग करते हैं। अतः बच्चों की सुरक्षा का प्रधान उपकरण ब्रेक ही है। इसीलिए बच्चों के लिए साइकिल खरीदते वक्त इसका विशेष ध्यान देना चाहिए।

  1. पहिए (Wheels):

बच्चों के लिए साइकिल खरीदते वक्त हमें विशेष रूप से यह ध्यान रखना चाहिए कि पहिए में बने तार सदैव तनाव की स्थिति में होने चाहिए। उनकी सही गुणवत्ता जानने के लिए उन्हें उंगली से बजा कर देखना चाहिए। यदि उनमें से आवाज आती हैं तो साइकिल अच्छी स्थिति में हैं।

  1. ढांचा (frame):

बच्चों की साइकिल के ढांचा की बनावट इस प्रकार होनी चाहिए कि उस पर लगने वाले पुर्जे कुशलतापूर्वक काम कर सके। ढांचे के ऊपर लगने वाला स्टीयरिंग सिरा उसके ऊपर लगने वाला हैंडल और आगे के डंठल की मध्य सिराए एक दूसरे से ठीक प्रकार से जुड़ी हुई होनी चाहिए। केवल तब ही यह बच्चों के लिए उपयुक्त हैं।

बच्चों के लिए साइकिल के प्रकार (Types of bicycles for kids):

बच्चों की साइकिल – kids bicycle मुख्यता उनके बनावट के आधार पर तीन प्रकार की होती है:-

  1. बैलेंस साइकिल (Balance Bicycle)
  2. सिंगल गियर वाली साइकिल (Single Geared Bicycle)
  3. मल्टी गियर वाली बाइक (Multi- Geared Bicycle)
  4. फोल्डेबल साइकिल (fouldable Bicycle)
  1. बैलेंस साइकिल (Balance Bicycle): बैलेंस साइकिल आम तौर पर 2 से 5 साल की उम्र के बच्चों के लिए होती है। इस साइकिल में पैडल नहीं होते हैं, ये बच्चों के संतुलन के अनुकूल तैयार किए जाते हैं। आपातकाल एवं जोखिम से बचने के लिए कुछ मॉडल्स प्रशिक्षण पहियों के साथ आते हैं। जिससे बच्चों को आपातकाल स्थिति में साइकिल संभालने की आदत बचपन से ही हो जाते हैं।
  1. सिंगल गियर वाली साइकिल (Single Geared Bicycle): सिंगल गियर वाली बाइक बच्चों द्वारा अधिक इस्तेमाल की जाने वाली साइकिल हैं। जो ज्यादातर चिकनी सतह पर सवारी करने के लिए उपयुक्त होती हैं। इस साइकिल पर पैडल साइकिल के पहियों के साथ चलते हैं, इस साइकिल में कोई गियर उपलब्ध नहीं होता हैं।
  1. मल्टी गियर वाली बाइक (Multi- Geared Bicycle): इस प्रकार के साइकिल को कई गियर के साथ डिज़ाइन किया जाता हैं। जो वाहन चालक को साइकिल का बेहद अच्छा नियंत्रण प्रदान करती है।
  1. फोल्डेबल साइकिल (fouldable Bicycle): इन सभी साइकिल्स की कैटेगरी में फोल्डेबल साइकिल सबसे अधिक उपयोगी हैं। इस साइकिल को कही भी ले जाया जा सकता है। हालाकि, आप इसके कल पुर्जे भी अलग कर सकते हैं। इस कारण आप इसे आसानी से पार्कों, मॉल्स और यात्रा के दौरान भी अपने साथ ले जा सकते हैं।

बच्चों के लिए साइकिल सम्बन्धित सुरक्षा सावधानियां (Safety Precautions while riding a cycle for kids):

चोटों या दुर्घटनाओं से बचने के लिए साइकिल चलाते समय कुछ सुरक्षा सावधानियों का पालन करना चाहिए।

  • साइकिल लेते समय सबसे पहले यह जांचें कि क्या साइकिल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करती है या नहीं। अच्छी तरह जांच कर लेने के बाद ही साइकिल खरीदे।
  • यदि आपका बच्चा नौसिखिया है, तो आपके लिए स्टेबलाइजर व्हील के साथ आने वाले साइकिल लेना ही फायदेमंद रहेगा।
  • साइकिल चलाते वक्त सुरक्षा के उद्देश्य से हेलमेट रखना अनिवार्य है, यह सुनिश्चित करता है कि आपका बच्चा सुरक्षित हैं।
  • नियमित रूप से पहियों की जांच करते रहना चाहिए और नियमित तौर पर इसकी सर्विसिंग भी करवानी चाहिए।
  • बच्चे को साइकिल के सभी भागों से अवगत कराएं जिससे आपातकाल की स्थिति में वह सही निर्णय ले सके।

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